June 17, 2019

ब्रिटिश राजा द्वारा भारत के पहले वाइसराय – लॉर्ड कैनिंग

ब्रिटिश राजा द्वारा भारत के पहले वाइसराय – लॉर्ड कैनिंग

लॉर्ड कैनिंग (1856 से 1862 ईस्वी)

लॉर्ड कैनिंग ईस्ट इंडिया कंपनी द्वारा नियुक्त अंतिम गवर्नर जनरल तथा ब्रिटिश सम्राट द्वारा नियुक्त भारत का प्रथम वायसराय था । लॉर्ड कैनिंग के शासनकाल की प्रमुख घटना 1857 ईस्वी का विद्रोह है जिसके पश्चात भारत शासन अधिनियम 1858 के तहत शासन व्यवस्था ईस्ट इंडिया कंपनी के हाथों से निकलकर ब्रिटिश सरकार के नियंत्रण में आ गया ।

1861 ईस्वी के इंडियन उच्च न्यायालय अधिनियम के अनुसार बंबई, कलकत्ता तथा मद्रास में एक-एक उच्च न्यायालय की स्थापना की गई । रानी विक्टोरिया के द्वारा व्यपगत सिद्धांत की समाप्ति की घोषणा की गई । 1859 ईस्वी में कंपनी के यूरोपीय सदस्यों द्वारा श्वेत विद्रोह किया गया था ।

लॉर्ड लॉरेंस के सुधार

लॉर्ड लॉरेंस (1864 से 1869 ईस्वी) :

लॉर्ड लॉरेंस के समय में 1865 ईस्वी में भूटान से युद्ध हुआ था । इसी के समय पंजाब काश्तकारी अधिनियम पारित किया गया था । इसने 1865 ईस्वी में भारत एवं यूरोप के बीच प्रथम समुद्री टेलीग्राफ सेवा प्रारंभ की थी ।

लॉर्ड मेयो (1869 से 1872 ईस्वी) :

लॉर्ड मेयो ने दो महाविद्यालयों – अजमेर में मेयो महाविद्यालय और काठियावाड़ में राजकोट महाविद्यालय की स्थापना की थी । इसी के समय प्रथम जनगणना 1872 ईसवी में संपन्न हुआ था । इसने 1872 में कृषि विभाग का गठन किया था । 1872 में अंडमान में 1 कैदी ने लॉर्ड मेयो की हत्या कर दी ।

लॉर्ड लिटन (1876 से 1880 ईस्वी ) :

लॉर्ड लिटन एक विख्यात कवि एवं उपन्यासकार था तथा साहित्य जगत में “ओवन मैरिडिथ” के नाम से प्रसिद्ध था । 1 जनवरी 1877 ईस्वी को दिल्ली में एक भव्य दरबार का आयोजन किया गया और महारानी विक्टोरिया को “कैसर ए हिंद” की उपाधि से विभूषित किया गया ।

लॉर्ड लिटन ने भारतीय भाषा समाचार पत्र अधिनियम (वर्नाक्यूलर प्रेस एक्ट) के द्वारा मार्च 1878 ईस्वी में भारतीय समाचार पत्रों पर कड़े प्रतिबंध लगा दिए । भारतीय शस्त्र अधिनियम 1878 के द्वारा भारतीयों को शस्त्र रखने के लिए लाइसेंस लेना अनिवार्य कर दिया गया । लॉर्ड लिटन ने सिविल सेवा में भारतीयों को हतोत्साहित करने के लिए अधिकतम उम्र सीमा 21 वर्ष से घटाकर 19 वर्ष कर दी ।

लॉर्ड रिपन (1880 से 1884 ईस्वी) :

लॉर्ड रिपन को फ्लोरेंस नाइटिंगेल ने “भारत के उद्धारक की संज्ञा दी है । लॉर्ड रिपन ने 1882 ईस्वी में स्थानीय स्वायत शासन की शुरुआत की थी । इसने 1882 ईस्वी में वर्नाक्यूलर प्रेस एक्ट को रद्द कर दिया । लॉर्ड रिपन ने सिविल सेवा परीक्षाओं में प्रवेश की अधिकतम आयु सीमा को पुनः 19 वर्ष से बढ़ाकर 21 वर्ष कर दिया ।

लॉर्ड रिपन के समय में ही 1881 ईस्वी में सर्वप्रथम नियमित 10 वर्षीय जनगणना प्रारंभ हुई  । लॉर्ड रिपन ने इल्बर्ट बिल के द्वारा भारतीय एवं यूरोपीय न्यायाधीशों की शक्तियों में समानता लाने का प्रयास किया किंतु यूरोपियनों के विरोध के कारण यह बिल नहीं पास हो पाया । अंग्रेजों द्वारा इल्बर्ट बिल के विरोध में किए गए विद्रोह को श्वेत विद्रोह के नाम से जाना जाता है ।

लॉर्ड डफरिन (1884 से 1888 ईस्वी) :

लॉर्ड डफरिन के समय 28 दिसंबर 1885 ईस्वी को ए ओ ह्यूम ने भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की स्थापना की थी । इस के समय में तृतीय आंग्ल बर्मा युद्ध (1885 – 1888 ईस्वी) हुआ था जिस में उपरी बर्मा को अंग्रेजी राज्य में मिला लिया गया था ।

लॉर्ड लैंसडाउन 1888 से 1894 ईस्वी) :

लॉर्ड लैंसडाउन के समय में ब्रिटिश भारत और अफ़ग़ानिस्तान के बीच सीमा निर्धारण किया गया जो डूरंड रेखा के नाम से प्रचलित है । 1891 ईस्वी में लॉर्ड लैंसडाउन के समय में दूसरा कारखाना अधिनियम पारित किया गया था ।

लॉर्ड कर्जन (1899 से 1905 ईस्वी) :

लॉर्ड कर्जन ने विभिन्न क्षेत्रों में सुधार के लिए कई आयोग गठित किए जिसमें 1902 ईस्वी में गठित पुलिस आयोग, 1920 ईस्वी में गठित शिक्षा आयोग आदि प्रमुख है । लॉर्ड कर्जन का सबसे घृणित कार्य 1905 ईस्वी में बंगाल का विभाजन था । लॉर्ड कर्जन ने भारतीय पुरातत्व विभाग की स्थापना की थी । इसी के समय में बिहार के पूसा में कृषि अनुसंधान संस्थान की स्थापना की गई थी ।

लॉर्ड मिंटो द्वितीय (1905 से 1910 ईस्वी) :

लॉर्ड मिंटो द्वितीय के समय में बंगाल विभाजन का विरोध किया गया और स्वदेशी आंदोलन को प्रश्रय दिया गया । 1907 ईस्वी में सूरत के कांग्रेस अधिवेशन में कांग्रेस पार्टी का विभाजन हो गया । लॉर्ड मिंटो द्वितीय के समय में ही 1906 ईस्वी में मुस्लिम लीग का गठन किया गया था । इसी के समय मार्ले मिंटो सुधार अधिनियम 1909 पारित किया गया जिसके अनुसार, मुसलमानों के लिए अलग निर्वाचन व्यवस्था लागू की गई थी ।

लॉर्ड हार्डिंग द्वितीय (1910 से 1916 ईस्वी) :

लॉर्ड हार्डिंग द्वितीय ने बंगाल विभाजन रद्द कर दिया । इसने 1912 ईस्वी में ब्रिटिश भारत की राजधानी कोलकाता से दिल्ली स्थांतरित की । दिल्ली में ब्रिटेन के राजा जॉर्ज पंचम एवं क्वीन मैरी के स्वागत के लिए भव्य दरबार का आयोजन किया गया था ।

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